Sunday, March 15, 2009

Talak Talak................

चाँद मोहम्मद ने आखिरकार फिजा को तलक दे ही दिया .यह तो होना ही था.लेकिन इस वक्त मैं फिजा या चाँद के बारे में बात करने नही जा रहा हु.हम तो बात करना चाहते है उस सिस्टम की जिसका की इनदोनों ने मजाक उड़ाया.वाकई में जिन्हें कानून की जानकारी होती है उनके लिए कानून के साथ खिलवार करना कितना आसान है ,बता दिया फिजा और चाँद ने .हिंदू धर्म में १९५६ एक्ट के बाद से बहु विवाह वैध कर दिया गया है तो बस फिर क्या था चंद्र मोहन और अनुराधा ने कानून के छेद का सहारा लिया ,बन गए चाँद और फिजा,कर ली निकाह दिखा दिया कानून के निर्माताओ को ठेंगा ।
सवाल यह उठता है की क्यों चंद्र मोहन और अनुराधा को धर्म बदलना पड़ा?निश्चित रूप से इसके पीछे एक ही कारन है की हिंदू धर्म अब दूसरी शादी को गैर कानूनी मना गया है .अब सवाल उठता है की क्यों बहु विवाह को हिंदू धर्म में कानूनन रोक लगा दी गई और मुस्लिम धर्म में इसकी इजाज़त है ?कैसे येह कानूनविद ने निर्धारित किया की हिंदू को बहु विवाह की जरुरत नही है और मुस्लिम को है?
हमारे देश में कानून बनने का मुख्य श्रोत है ...परम्परा .हिंदू धर्म को भी मानने वाले लोग पहले एक से जायदा शादिया किया करते थे.एक तरह से येह परम्परा ही है.तो फिर कैसे कानून बनाने वालों ने सोच लिया की हिंदू के लिए बहुविवाह जरुरी नही है और मुसलमानो के लिए है.उनके इस सोच के पीछे क्या सोच थी ,पता नही.यहाँ ठगा हुआ कौन है,हिंदू या मुस्लिम.क्यों हिन्दुओं के बहु विवाह के अधिकार का हनन कर दिया गया और मुस्लिम का रहने दे दिया क्यों....?
अब वक्त आ गया है की देश में एक सामान कानून को बगैर वोट बैंक के लालच में आए लागू कर देना चाहिए.इससे समाज में एकरूपता ,समरसता आएगी . शादी करने वाले चंद्र मोहन या धर्मेन्द्र कभी चाँद बनकर या फिर दिलावर बनकर अपना कम कर ही लेते है.मगर अगर सचमुच ही बहु विवाह जरुरी है तो इसका लाभ हिन्दुओं को भी उठाने देने चाहिए.